बुराई करने से क्या होगा- A Motivational Story

किसी की बुराई करने से क्या होगा?

बुराई करना एक आम धारणा सी बन गई है। आजकल भाई हो, दोस्तों हो, हर किसी की जुबान पर बुराई ही भरी रहती है। अच्छे चीज को पहचानना मुश्किल है। इसके विपरीत बुरी चीज बुरी आदतें को सीखना या ग्रहण करना बिल्कुल आसान है।

हमें किसी व्यक्ति में अच्छाई ढूंढने पड़ती हैं। लेकिन बुराई बिना ढूंढे ही मिल जाती है। जबकि हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि दुनिया की प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर ने बनाया है। उसमें कोई ना कोई अच्छा गुण जरूर है। बस उसे ढूंढना पड़ता है।

दोस्तों, शास्त्रों में कहा गया है विष्णु भगवान ही है जिसके पास कोई बुराई नहीं है। उसके अलावा जितने भी इंसान हैं सबमें कुछ ना कुछ बुराई जरूर है।

जिस प्रकार मक्खी शरीर के किसी भी अंग पर नहीं बैठेगी वह किसी घाव या जहां पर गंदगी हो वही बैठेगी। ठीक उसी प्रकार बुरे लोग किसी भी मनुष्य की सभी अच्छाई छोड़कर सिर्फ बुरी चीजों को देखता है।

किसी की बुराई करना शास्त्रों में पाप कहा गया है। इससे आप पाप में भागीदारी बनते हैं। कभी कभी बुराई या गलत काम करने वाले से भी ज्यादा बुरा, व्यक्ति की बुराई करने वाला बन जाता है।

सभी दोष बुराई करने वाले पर आ जाता है। जिस व्यक्ति ने गलत काम किया वह बच  जाता है। इसलिए किसी की बुराई करते हैं तो काफी सोच समझ कर करें।

केवल बुराई करने से हत्या का दोषी  Motivational Story

मैं आपको एक कहानी बता रहा हूं। इसमें आप समझ जाएंगे कि बुराई करने वाला दोषी हो गया।

एक बार की बात है एक प्रतापी राजा था। उन्हें ब्राह्मणों को भोजन कराने में बहुत आनंद आता था। वह प्रत्येक दिन 100 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद ही भोजन करता था।

एक बार की बात है राजा सो ब्राह्मणों के भोजन की व्यवस्था कर रहा था। भोजन बन के तैयार था। आकाश से एक चील पक्षी एक नाग सांप को पकड़ के उड़ रहा था। नाग सांप जान बचाने के लिए तड़प रहा था। तभी उसके मुंह से ज़हर निकला।

ज़हर ऊपर से गिरा और सीधे राजा द्वारा बनाए गए भोजन में गिर गया। किसी ने भी नहीं देखा कि भोजन में ज़हर गिर गया है। भोजन करने के उपरांत सभी 100 ब्राह्मण की मृत्यु हो गई।

यमराज के दरबार में चित्रगुप्त जब हिसाब किताब लगा रहे थे तो बार-बार सोच रहे थे कि मृत्यु का दोष किसके ऊपर डाला जाए। राजा जिसको पता ही नहीं कि भोजन में जहर है या फिर नाग, उसे क्या पता उसके मुंह से निकला ज़हर नीचे उस भोजन में गिर गया है। वह तो अपना जान बचा रहा था।

चील  पंछी को दोष नहीं दिया जा सकता है क्योंकि वह तो अपना भोजन लेकर जा रहा था। ब्राह्मण का  तो मृत्यु ही हो गया उसे दोष कैसे दिया जा सकता है।

चित्रगुप्त को यह समझ नहीं आ रहा था यह सब ब्राह्मण की हत्या का दोष किस पर डाला जाए। 2 दिन बाद राजा अपने राज्य का भ्रमण करने के लिए निकला। तभी एक महिला बोल दिया कि वह देखो इस राजा ने 100 ब्राह्मण की हत्या कर दी।

चित्रगुप्त के पास यह सूचना गया  और उस महिला के ऊपर 100 ब्राह्मण की हत्या का पाप डाल दिया गया। चित्रगुप्त के अनुसार हत्या का दोषी महिला है क्योंकि उसने निर्दोष राजा की बुराई की है।

इस प्रकार आप समझ गए होंगें कि बुराई करने वाला ही सबसे बड़ा दोषी बन जाता है। इसलिए बुराई करते समय काफी सोच समझकर किसी की बुराई करें।

बुराई कौन करता है?

अब सवाल यह आता है कि बुराई कौन करता है? वह कौन लोग है जो हमेशा दूसरों की बुराई करता है? एक शब्द में उत्तर है वह बुरा लोग हैं। बुरा लोग ही दूसरों की बुराई करते हैं। अच्छे लोग कभी भी दूसरे की बुराई नहीं करते।

अब यह सवाल आता है आपकी बुराई कौन करता है? आपकी बुराई तीन प्रकार के लोग करते हैं। पहला वह लोग जिसे आपकी सफलता देखी नहीं जा रही है। दूसरा वह लोग जो आपकी तरह काम करना चाहता है लेकिन कर नहीं पा रहा है। और तीसरा वह लोग हैं जो आपको आमने सामने पराजित नहीं कर सकता। इसलिए पीठ पीछे बुराई करके आपको बदनाम करना चाहता है।

आप आपके मन में यह सवाल आता है यदि आपका कोई बुराई करता है तो आप उसके लिए क्या करें? इसका सीधा जवाब यह है कि आप उसके विरुद्ध कुछ नहीं करें। क्योंकि कोई व्यक्ति जब दूसरों की बुराई करता है वह खुद अपना चरित्र स्पष्ट करता है। सबकी नजर में वह गिर जाता है।

आपका वह कुछ भी नहीं सकता। आप अपना काम करते रहे। ना ही आपक स्पष्टीकरण देना है और ना ही आपको उसके बहस करके आपका समय बर्बाद करना है।

एक कहावत है जो कुछ काम करेगा उसी से कुछ गलती भी हो सकती हैं। जो कुछ करेगा ही नहीं निट्ठल्ला बैठा रहेगा उससे कुछ गलती कैसे हो सकती है। इसलिए अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहन करें उसकी बुराई ना करें।

अगर आप उसके अच्छे दोस्त हैं तो एकांत में जाकर उसे सच्ची सलाह दें। पीठ पीछे उसकी बुराई कभी भी ना करें।

धन्यवाद।

Leave a Comment